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मंथन : विकास की राजनीति या फिर सत्ता की

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अभी कुछ हीं महीने में चुनाव का दौर शुरू होना है, जनता तो सब हमेशा से ही जानती है, पर इनकी अपेक्षा राजनेताओं से भी होती है कि वे खुद बताये.

मोदी Vs राहुल

राजनेताओं पर भी आगामी चुनावों का दवाब है, चुनावी परिणामों में अच्छा करने की होड़ है. सवाल यह है कि जो अच्छा marks लाएगा, क्या वो सरकार बनाएगा या सत्ता में आयेगा? सवाल बेतुका लगता है, क्यूँकि दोनों का देखने में मतलब एक ही लगता है.

लोकतंत्र में सरकार जनता चुनती है और सरकार भी तो जनता की होती है, क्यूँकि सरकार में जनता के चुने हीं प्रतिनिधि होते हैं. आप इन प्रतिनिधियों को एक सामाजिक सेवक भी कहें तो गलत नहीं होगा. परंतु अगर यह सेवक का नाटक कर रहे तो इसे सत्ता की लड़ाई बोल सकते हैं.

अभी कई मुद्दे बड़े हीं जोरो पर है, और इन मुद्दों को लेकर, राजनैतिक दल आपस के वाद विवाद में लगे हैं, परंतु यहाँ जनता को ध्यान देना होगा कि, ऐसे माहोल में ना तो पक्ष और ना तो विपक्ष हीं अपना पूरा इस देश को दे पाएँगे, क्यूंकि इनका ध्यान तो आरोप प्रत्यारोप पर भी होगा.

अगर दूसरी पहलू देखा जाए तो, यह मुद्दे से भटकाने वाले भी हो सकता है. तो आने वाले चुनाव में सजग हो, अपना कीमती मत अवश्य दे, और चुने सही प्रतिनिधि को. आइए देखें आज ट्विटर पर क्या चल रहा.

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